Sunday, August 1, 2010

अब कोई हक़ नहीं, मोदी सरकार को बने रहने का!
अज़ीज़ बर्नी

नरेंद्र मोदी अगर आज भी गुजरात राज्य के मुख्य मंत्री हैं तो इसका कारण है केंद्र सरकार में दृढ़ इच्छा शक्ति का न होना, वरना फरवरी 2002 के साम्प्रदायिक दंगों में गुजरात के चेहरे पर कलंक लगाने वाला यह व्यक्ति आज सलाख़ों के पीछे होता। यह बात उसी समय विभिन्न ज़िम्मेदार राजनीतिज्ञों ने कही थी, जिसे मैं आजके अपने लेख की इस कड़ी में अपने पाठकों के सामने रखने जा रहा हूं।

नरेंद्र मोदी अगर आज भी गुजरात के मुख्यमंत्री हैं तो इसका कारण हमारे क़ानून के अंदर कुछ ऐसे छेद भी हैं जिनसे मिलने वाली आॅक्सीजन ऐसे लोगांें को भी जीवन प्रदान करती रहती है, जिनका जीवन देश तथा जनता के प्रति किसी नासूर से कम नहीं होता, वरना जिस प्रकार 6 दिसम्बर 1992 को बाबरी मस्जिद की शहादत के बाद जिन 4 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें थीं, उन सभी को बर्ख़ास्त कर दिया गया था, उसी प्रकार न केवल यह कि नरेंद्र मोदी को गुजरात में मुसलमानों के नरसंहार के बाद बरख़ास्त कर दिया जाता, बल्कि फिर कभी राजनीति में भाग लेने के लिए अयोग्य भी घोषित कर दिया जाता। यहां उस समय भारतीय जनता पार्टी की सरकारों को बर्ख़ास्त कर दिए जाने का उदाहरण इसलिए पेश किया गया कि उसका कारण भी यही था कि देश की धर्मनिरपेक्ष तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में साम्प्रदायिकता के लिए कोई गुंजाइश नहीं है और जिस पार्टी के कार्यों ने यह सिद्ध कर दिया कि न तो उसका लोकतंत्र पर विश्वास है और न ही वह धर्मनिरपेक्षता पर अग्रसर है, इसीलिए उन राज्य सरकारों को बर्ख़ास्त कर दिया गया जहां जहां उस पार्टी की सरकारें थीं भले ही वह प्रतयक्ष रूप से बाबरी मस्जिद की शहादत के लिए ज़िम्मेदार नहीं थीं। आज हमारे क़ानूनविदों को इस दिशा में सोचने की आवश्यकता है कि जो कुछ 6 दिसम्बर 1992 को हुआ, क्या उसके 10 वर्ष बाद गुजरात में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुआ मुसलमानों का नरसंहार कितना अलग मामला था।

नरेन्द्र मोदी आज भी अगर गुजरात के मुख्यमंत्री हैं तो इसका कारण हमारी चुनाव व्यवस्था की ख़ामी व मतदाताओं का पूर्णतः जागरुक न होना व साम्प्रदायिकता व जातिवाद के भ्रामक प्रचार में फंस जाना भी है।

आज नरेंद्र मोदी सोहराबुद्दीन फ़र्ज़ी एन्काउन्टर मामले को गुजरात राज्य के बाहर ले जाने के सीबीआई के प्रयासों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहते हैं कि ‘क्या गुजरात भारत का अंग नहीं है? गुजरात को एक शत्रु देश की तरह क्यों समझा जा रहा है?’ काश कि वह अपना चेहरा आईने में देख लेते तो उन्हंे अपने हर प्रश्न का उत्तर मिल जाता। उनके शासनकाल में गुजरात में जो कुछ हुआ, उस पर देश के ज़िम्मेदारों की राय क्या है और क्या थी जब हम आने वाली पंक्तियों में यह बयान करेंगे तो वह अच्छी तरह समझ लेंगे कि यही वह आईना है जिसमें हम उन्हें अपना चेहरा देखने के लिए कह रहे हैं। साथ्ी ही हम यह भी कह देना चाहते हैं कि वह उस समय क्यों ख़ामोश रहे जब उच्चतम न्यायालय के आदेश पर गोधरा कांड की जांच को गुजरात से बाहर हस्तांतरित कर दिया गया था। आइए अब बात करते हैं सीबीआई द्वारा सोहराबुद्दीन एन्काउन्टर मामले को गुजरात के बाहर ले जाने के प्रयास पर नरेंद्र मोदी के क्रोधित होने की।

अभी सीबीआई द्वारा की गई जांच पर आधारित वह चार्ज शीट पूरी तरह सामने आई भी नहीं है, जो न केवल नरेंद्र मोदी, उनकी सरकार बल्कि संघ परिवार के उस चेहरे को बेनक़ाब कर सकती है, जिसने आज़ादी के मसीहा महात्मा गांधी की हत्या करने के बाद ही अपनी मानसिकता को सामने रख दिया था। हमें अंदाज़ा है कि यह तथ्य एक आम भारतीय के लिए अविश्वसनीय होगा कि केवल अमित शाह ही नहीं, केवल वंजारा ही नहीं या केवल वे लोग ही नहीं, जिनके नाम अभी तक सोहराबुद्दीन फ़र्ज़ी एन्काउन्टर के सिलसिले में सामने आए हैं बल्कि पूरी गुजरात सरकार इसमें गले-गले तक शामिल नज़र आती है। संभवतः नरेंद्र मोदी इसीलिए भयभीत हैं कि बात अमित शाह पर समाप्त नहीं होगी और न ही हरेन पांडिया की तरह अमित शाह की ज़ुबान ख़ामोश हो जाना समस्या का समाधान हो सकता है। दरअसल नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ स्वयं ही गृहमंत्री भी हैं। अमित शाह उनके अधीन गृहमंत्रालय की ज़िम्मेदारियां देखते रहे हैं, वह कैबिनेट स्तर के मंत्री नहीं थे। वैसे भी उनकी पहचान मोदी के विश्वस्त आज्ञाकारी तथा आदेश का पालन करने वाले मंत्री की ही रही है और जहां तक सोहराबुद्दीन को रास्ते से हटाने का मामला है तो यह केवल एक फ़र्ज़ी एन्काउन्टर ही नहीं था इसकी पृष्ठ भूमि में और बहुत कुछ था। परतें खुलने दीजिए फिर देखिए क्या क्या चैंका देने वाले तथ्य सामने आते हैं। संक्षिप्त में यह समझें कि सोहराबुद्दीन का फ़र्जी एन्काउन्टर मुसलमानों को बदनाम करने के लिए, उसे मोदी का हत्यारा तथा आतंकवादी सिद्ध करने के लिए ही नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी की महिमा मंडन करने के लिए, उनके अधीन चलने वाले तमाम भ्रष्टाचारों पर पर्दा डालने के लिए आवश्यक हो गया था।

न जाने क्यों अब भी केंद्र सरकार इतनी हिम्मत नहीं कर पा रही है कि वह स्पष्ट प्रमाण होने पर गुजरात सरकार को बर्ख़ास्त कर दे। नरेंद्र मोदी पर मुक़दमा चलाए ताकि क़ानून के अनुसार उन्हें सज़ा मिले। अगर इस मामले को इतना लम्बा खींचने की आवश्यकता केवल इसलिए महसूस की जा रही है कि जब तक चुनावों का समय नज़दीक न आ जाए मामले को तूल देकर माहौल बनाया जाता रहे। तो यह एक सकारात्मक सोच नहीं है। इससे अगर कांगे्रस को यह अवसर प्राप्त होता है कि देर तक ऐसे मामलों को चर्चा का विषय बना कर जनता के मन को तैयार करे तो दूसरी ओर साम्प्रदायिक शक्तियों को भी बचाव के रास्ते निकालने के लिए अवसर मिल जाता है और बहरहाल नरेंद्र मोदी चर्बज़ुबान होने के साथ साथ इस काम में महारत भी रखते हैं। हमारे सामने इस समय कई ऐसे ज़िम्मेदार व्यक्तियों के बयान हैं, जिन्होंने गुजरात दंगों के बाद ही नरेंद्र मोदी को बखऱ्ास्त करने की बात कही थी, जो आज केंद्र सरकार में मंत्री हैं या पार्लियमिंट में भी मज़बूत पोज़िशन रखते हैं। हमने जानबूझ कर इस समय माले गांव जांच के सिलसिले में शहीद हेमंत करकरे द्वारा सामने लाये गए चेहरों का उल्लेख नहीं किया और उनके इस प्रयास की प्रतिक्रिया क्या हुई, उस पर चर्चा नहीं की, क्योंकि अपने इस क्रमवार लेख में आगे हम यह स्पष्ट कर देने का इरादा रखते हैं कि क्रिया की प्रतिक्रिया की यह फ़्लासफ़ी किस हद तक संघ परिवार के पोषित लोगों के दिल व दिमाग़ पर छाई हुई है और वह उसके लिए किस हद तक जा सकते हैं।

अब वह बयानात जिनमें गुजरात दंगों के बाद ही मोदी को बर्ख़ास्त करने की बात कही गई थी।

प्रणव मुखर्जी (सीनियर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता)

देश की एकता तथा लोगों की जान व माल की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सरकार की है अगर वह इसे निभाने में सक्षम नहीं हैं तो उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। अगर यही स्थिति रही तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि एक दंगाई राष्ट्र के रूप में बनेगी।

(राष्ट्रीय सहारा, नई दिल्ली, शुक्रवार 8 मार्च 2002, पृष्ठ-7, क-3)

कपिल सिब्बल (वरिष्ठ कांग्रेस नेता):

नरेंद्र मोदी को अविलंब पद से हटाना और दंगों की जांच सर्वोच्च न्यायालय के वर्ततान न्यायाधीश से करानी चाहिए। गुजरात की इन घटनाओं से देश का सर शर्म से झुक गया है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल अपराधी, आतंकवादी तथा ठगों एवं गुंडों की जमात है जिसे पिछले तीन सालों से खुला छोड़ दिया गया है और वह हर जगह तनाव और हिंसा फैलाकर भाजपा की राजनीति को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में क्यों कहा जाता है कि अफ़ग़ानिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देता था या नाज़ी एक ख़ास समुदाय का क़त्ले आम करते थे। अब तो इनके भाई हमारे यहां ही मौजूद हैं।

(राष्ट्रीय सहारा, नई दिल्ली-शुक्रवार 8 मार्च, 2002 पृष्ठ 7, क-1)

ममता बनर्जी (पूर्व केन्द्रीय मंत्री व अध्यक्ष तृनमूल कांग्रेस)

गुजरात में जो भी हुआ वह जघन्य अपराध है। हमें सभी समुदाय की महिलाओं और बच्चों पर हुए अत्याचार को देख कर आघात लगा है। यह कहते हुए मेरा सर शर्म से झुक रहा है कि अब राजनेता लाशों के ढेर पर भी कुर्सी की राजनीति कर रहे हैं। अगर इस घृणित कार्य को रोका नहीं गया तो आने वाली पीढ़ी हमें माफ़ नहीं करेगी।

(राष्ट्रीय सहारा, नई दिल्ली-12 मार्च 2002 पृष्ठ 7, क-2)

मुलायम सिंह यादव (पूर्व रक्षामंत्री)

गुजरात की घटनाएं भयावह हैं। वहीं सारी गड़बड़ियां सरकार के संरक्षण में हो रही हैं। वहाँ कुछ ऐसा हो रहा है जैसे रोम जल रहा है और नीरो बांसुरी बजा रहा हो। गुजरात की घटनाओं को गोधरा की प्रतिक्रिया कह कर टाला नहीं जा सकता। गुजरात की घटनाएं ‘‘मानवता की हत्या’’ जैसी है और एक राज्य के मुख्यमंत्री को बचाने के लिए देश तोड़ने की साज़िश उचित नहीं है। मोदी सरकार दंगों को रोकने के बजाए उन्हें बढ़ाने में लगी हुई है।

(राष्ट्रीय सहारा, नई दिल्ली, 1 मई 2002, पृष्ठ-1,)

लालू प्रसाद यादव (अध्या राष्ट्रीय जनता दल)

गोधरा कांड के पीछे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की साज़िश है। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को राज्य की जनता के ख़िलाफ़ आपराधिक षड़यंत्र के आरोप में गिरफ़्तार किया जाए। श्री वाजपेयी करोड़ रुपए का पैकेज देकर मोदी का पाप नहीं धो सकते।

(राष्ट्रीय सहारा, नई दिल्ली, शुक्रवार 3 मई 2002, पृष्ठ-1, क-2)

जब तक मोदी सलाख़ों के पीछे नहीं भेजा जाएगा, तब तक महात्मा गांधी के गुजरात में शांति नहीं हो पाएगी।

(राष्ट्रीय सहारा, नई दिल्ली, 15 मई 2002, पृष्ठ-7, क-1)

अमर सिंह (महासचि समाजवादी पार्टी)

गुजरात का ज़ख़्म मोदी के हटने से ही भरेगा। मोदी हिंदुत्व के ठेकेदार हैं। आर॰एस॰एस॰ की प्रयोगशाला के वह ऐसे वैज्ञानिक हैं जिन्होंने साम्प्रदायिक उन्माद को फैलाने वाली लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा को भी पीछे छोड़ दिया है।

(राष्ट्रीय सहारा, नई दिल्ली, शुक्रवार 11 मई 2002, हस्तक्षेप पृष्ठ-1, क-1)

सीता राम येचुरी (वरिष्ठ नेता माकपा, सदस्य पाॅलित ब्यूरो)

आज़ादी के बाद भारत के इतिहास में यह पहली बार सरकार प्रायोजित दंगा हुआ है केन्द्र सरकार ने अनुच्छेद 355 के तहत कारवाई करने के आश्वासन दिए थे लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया गया है इसलिए गुजरात में अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू किया जाना चाहिए।

(राष्ट्रीय सहारा, नई दिल्ली, शनिवार 11 मई 2002, पृष्ठ-7, क-1)

1 comment:

jitesh said...

mai to ye kehta hu ki pure bharat me MODIJI ke jaisa C.M. hona chahiye. to hi bharat ka vikas hoga
CONGRESS SARKAR TO SIRF MUSLIMO KE PAKSH ME VICHAR KARTI HAI. HUM 2 HAMARE 2 YE BAT MUSLIMO PE KYU LAGU NAHI HOTI. BHARAT LOKSANKYA ME KITNI BADHOTRI HO RAHI HAI. ISPAR VICHAR KU NAHI HOTA. MODIJI KO DOSH DE RAHE HAI. JAI HIND JAI BHARAT.