Tuesday, December 2, 2008


करकरे अडवानी द्वारा लगाये गए आरोप से दुखी थे : जूलियो रिबेरो
हेमंत करकरे पिछले मंगलवार को मुझ से मिलने के लिए आए थे। एल के अडवाणी के इस आरोप ने उन्हें बहोत दुःख पहुँचाया था के उन के नेतृत्व में ऐ टी एस मालेगाँव बम धमाकों के केस में राजनितिक प्रभाव और अव्योहरिक ढंग में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने ने स्पष्ट किया था की ऐ टी एस ने साध्वी प्रज्ञा सिंह के विरोध में ठोस और पक्के सबूत एकत्रित किए हैं और जांच सफल होने वाली है। अडवाणी जैसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता के हिंदू तत्व के झंडा बरदार बन्ने वालों के साथ मिल कर आरोप लगाने ने उन्हें आश्चर्यचकित करदिया था। हेमंत करकरे एक सच्चे हिंदू थे। वे अपने धरम पर विश्वास रखते थे और उन का विचार था की उन के सहधर्मी भी इसी प्रकार अमल करें। उन्हें इस सह दुर्घटना ने चकित कर दिया था की हिंदू तत्व का प्रचार करने वाले हिंदू धरम के आदेशों पर अमल नहीं कर रहे हैं। ऐ टी एस चीफ महाराष्ट्र एक बेहतरीन पुलिस अधिकारी थे और मैं अगर यह कहूं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी की उन की गिनती भारत के सक्षम और बहतरीन अधिकारीयों में थी। उन की ईमानदारी किसी संदेह से ऊपर है। मुंबई पुलिस का वरिष्ठ नेतृत्व निजी रूप से भ्रुष्ठ और ईमानदार अधिकारीयों में विभाजित है। हेमंत करकरे को ईमानदार अधिकारी के रूप में गिना जाता था। उनकी योग्यता और कार्यक्षमता अतियाधिक उच्याकोटी की थी। उन्हें जनता में लोकप्रियता प्राप्त रही। गढ़चिरोली में एस पी के रूप में नक्सलवादियों ने उन्हें जान से मारने का प्रयास किया था। दिल्ली बम धमाकों के बाद इंडियन मुजाहिदीन ने भी उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। अँधेरी मोगरा पाडा में काम्बिंग ओपेराशन के समय मुसलमानों ने उन के कार्यालय का घेराओ किया था और अंतत: वह भगवा ब्रिगेड के मिथ्या आरोप का शिकार बन गए। हिंदुत्व शक्तियों ने जिहादियों के विरुद्ध कार्यवाही पर ऐ टी एस की पीठ थपथपाई परन्तु जब मालेगाँव धमाके के बाद उस ने भगवा आतंकवाद की दिशा में रुख बदल लिया तो जांच पर प्रशन उठाने शुरू कर दिए। इस में उच्य भाजपा नेतृत्व भी पीछे नहीं रहा। एल के अडवाणी ने जांच को राजनितिक प्रभाव में और अव्योहरिक करार दे दिया। करकरे इस बात से अच्छी तरह परिचित थे की इस मार्ग पर चलते हुए वह राजनीती का शिकार बन सकते हैं परन्तु उन्होंने सच्चाई का दामन हीं छोड़ा था। प्रत्येक भाजपा की सच्चाई को झुठलाने और हटधर्मी की नीति से परिचित है लेकिन जांच के दौरान होने वाले रहस्योद्घाटन उन के होश उडादेंगे। ऐ टी एस के विरुद्ध मुहीम और मालेगओं धमाके को राजनितिक रंग देने के प्रयास से भाजपा को अगले चुनाव में कुछ वोट तो प्राप्त हो सकते हैं परन्तु इस पारकर वह न्यायिक व्यवस्था के कार्य को हानि पहुँचा कर आग से खेल रहे हाँ। यदि भाजपा सत्ता में आती है तब वह ऐ टी एस द्वारा बड़े परिश्रम से एकत्रित किए गए प्रमाण और सबूतों का क्या करेगी? और क्या वह हिंदू संप्रदाय में मौजूद उग्रवादी तत्वों को आतंकवाद फैलाने की छूट देदेगी? उन्हें अपनी रोगग्रस्त मानसिकता और कार्यशैली से जन्म लेने वाली गंभीर स्तिथि पर गहराई से विचार करना होगा।
हेमंत करकरे एक योग्य और अदभुत अधिकारी थे। वह अब उन पर लगाये जाने वाले आरोप (दाग) मिटाने के लिए जीवित नहीं हैं। उन्होंने अपने सिद्धांतों के लिए अपने पर्णों की आहुति दी।

3 comments:

majid said...

Burny sahab shayad apne ek-ek alfaaz sahee likhaa ha par ye manegaa kaun agar ho sake to please apnaa ek news paper nikaaliye aur bekasoor wo chahe dalit ho ya cristion ho ya muslim inke katleaam karke kursee tak jaane waale aur aise aatankee group kee asliyat jantaa ke saamne laaeye

EXPIRE DREAM... said...

Mr.aziz burney
I RESPECT YOU FOR every true word which came out from your pen.
thanks for.

indscribe said...

Majid,
Aren't you aware that he is editor of Roznama Sahara Urdu that has nine editions and he publishes these columns in Hindi script also in the same paper.