Wednesday, February 17, 2010
ये नाम बदल जाते तो मंज़र बदल जाता
दैनिक जागरण, 16.02.2010, पृष्ठ-1
पाकिस्तान से जुड़ रहे तार
नई दिल्ली, जागरण ब्यूरोः पुणे में शनिवार को हुए विस्फोट के तार लश्कर आतंकी डेविड हेडली और इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ते नज़र आ रहे है। शुरूआती जांच से संकेत मिले हैं कि कराची में रची गई साज़िश को इंडियन मुजाहिदीन के हिन्दुस्तानी आतंकियों ने अंजाम तक पहुंचाया है। गृह सचिव जी.के.पिल्लै ने हेडली के कराची प्रोजेक्ट का हवाला देते हुए आईएसआई पर भी निशाना साधा और साफ कहा, ‘विदेशी हाथ होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।’ गृहमंत्री पी.चिदंबरम पहले ही हेडली की तरफ अंगुली उठा चुके हैं।केंद्र सरकार के रवैये से साफ है कि भारत लश्कर-ए-तैयबा के इस खुराफाती दिमाग़ तक पहुंचने के लिए अमेरिका पर दबाव बनाने में जुटा है। साथ ही, इस्लामाबाद के साथ बातचीत की मेज़ पर जाने से पहले अपनी पेशबंदी भी कर रहा है। ताज़ा धमाके का पोस्टमार्टम करने में जुटी सुरक्षा एजेंसियों को अब यह फिक्र सताने लगी है कि कहीं पुणे की तर्ज़ पर बम धमाके देश के अन्या इलाकों में भी हेडली और उसके साथी तहव्वुर हुसैन राणा की योजनाओं की तामीर न कर दें। दरअसल, सुरक्षा तंत्र इस सच से हलकान है कि बीते चार महीनों से अमेरिकी क़ानूनी कठघरे में खड़ें हेडली की योजना अंजाम तक पहुँच गई। ऐसे में भारत अब हेडली तक पहुँचने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। पिल्लै के अनुसार हम हेडली तक पहुँचने का प्रयास करेंगे। ज़रूरत पड़ी तो हेडली के ख़िलाफ अमेरिकी अदालत का भी दरवाज़ा खटखटाएंगे। गृह सचिव ने कहा, ‘कराची प्रोजेक्ट के तहत हेडली भारतीय नौजवानों और पाकिस्तान के प्रति निष्ठा रखने वाले तत्वों को सीमा पार से प्रशिक्षित कर भारत में तबाही फैलाने के लिए भेजने वाले नेटवर्क का अहम हिस्सा रहा है।’ पिल्लै ने आगे जोड़ा कि हेडली का सीधा संबंध पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से रहा है। भारतीय नौजवानों से आतंकी वारदात करा आईएसआई यह साबित करने की कोशिश करती रही है कि यहां हो रहे हमले में पाकिस्तान का हाथ नहीं है, बल्कि स्थानीय लोग शामिल हैं। पिल्लै ने कहा कि कराची प्रोजक्ट का उद्देश्य ही यही रहा है। हालांकि उन्होंने इस संबंध में पाकिस्तान पर सीधा आरोप नहीं लगाया। पुणे धमाके में पाकिस्तान का हाथ होने संबंधी सवाल पर पिल्लै ने कहा, ‘अभी तक सभी घटनाओं में पड़ोसी मुल्क का हाथ रहा है। पुणे मामले की जांच जारी है, लिहाज़ा अभी इस पर कुछ नहीं कहेंगे।’ पर वह विदेशी हाथ की आशंका जताने से नहीं चूके। गौरतलब है कि शिकागो की जेल में बंद पाकिस्तानी मूल का अमेरिकी नागरिक हेडली उर्फ दाऊद गिलानी 26 नवम्बर को मुंबई पर हमले से पहले पांच बार भारत आया और हर बार यहां से पाकिस्तान गया। हेडली और राणा भारत में कई आतंकी हमलों के लिए ज़िम्मेदार इंडियन मुजाहिदीन को पालने-पोसने के लिए प्रमुख रूप से ज़िम्मेदार है। अभी तक हुई गिरफ्तारियों और मिले सुबूतों के आधार पर भारतीय एजेंसियां इस निष्कर्ष पर पहुंची हैं कि पुणे की वारदात को इंडियन मुजाहिदीन के स्लीपर सेल ने अंजाम दिया है।नोटः- इस ख़बर के संबंध में मुझे ज़्यादा कुछ नहीं कहना, सिवाय इसके कि ज़रा हेडली को एफ।बी.आई के एजेंट के रूप में सामने रख कर पढ़ें और फिर देखें कि क्या तस्वीर उभरती है।
दैनिक जागरण, 16.02.2010, पृष्ठ-1
गुजरात में फिर मिला तबाही का सामान
राजकोट, प्रेट्रः गुजरात पुलिस ने राज्य के सुरेंद्रनगर और पंचमहल जिलों में विस्फोटकों की बड़ी खेप बरामद की है। इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। एक दिन पहले ही वलसाड ज़िले से चार लोगों को बड़ी मात्रा में विस्फोटकों के साथ गिरफ्तार किया गया था। सुरेंद्रनगर स्पेशल आपरेशन गु्रप (एसओजी) के सदस्यों ने रविवार देर रात राजकोट-अहमदाबाद राजमार्ग पर सुरेंद्रनगर के लिबंडी क़स्बे के क़रीब अवैध रूप से बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री ले जा रहे कल्पेश गोहिल (29) नामक युवक को पकड़ा। कल्पेश की कार से 50 किलोग्राम अमोनियम नाइटेªट के अलावा 850 जिलेटिन छड़ें, 300 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर और 100 सेंट्री फ्यूज़ बरामद की गई। कल्पेश को विस्फोटक सामग्री क़ानून के तहत गिरफ्तार किया गया है। पंचमहाल ज़िले के गोधरा तालुका में भी एक ट्रैक्टर की तलाशी के दौरान 84 डेटोनेटर और 62 जिलेटिन छड़ें बरामद की गई। इस संबंध में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एक दिन पहले ही वलसाड के वापी में 200 किग्रा अमोनियम नाइटेªट, 600 डेटोनेटर और 200 जिलेटिन छड़ों के साथ चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
नोटः- यह ख़बर भी आज ही की है, अर्थात 16।02.2010 की। अब ज़रा सोचें कि यह विस्फोटक पदार्थ गुजरात की बजाय उत्तरप्रदेश के शहर आज़मगढ़ से बरामद हुआ होता तो क्या होता?
इंडियन एक्सप्रेस-25.10.2008
कानपुर धमाके में मारे गए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का सम्बंध मुम्बई से हो सकता है
उत्तर प्रदेश की ए।टी.एस ने मुम्बई की ए.टी.एस से मदद मांगी है। यह मदद कानुपर में फलैट के भीतर हुए धमाके, जिसमें बजरंग दल के दो कार्यकर्ताओं की मृत्यु हो गई थी, से सम्बंधित है। इस कमरे में कोई और नहीं था। बाद में पुलिस को उस कमरे से भारी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ और बम बनाने के उपकरण मिले थे। ए.टी.एस ने पाया कि धमाके में मारे गए दो लोगों में से एक राजीव मिश्रा अक्सर अपने घर से अप्रैल और मई माह में मुम्बई के सैल नम्बरों पर फ़ोन करता था। धमाकों के बाद नम्बर बंद हो गए। जांच के बाद ए.टी.एस ने पाया कि सैल फ़ोन कनैक्शन प्राप्त करने हेतु जमा पहचान और पते के प्रमाण पत्र फ़र्ज़ी थे।धमाकों के उपरांत कानुपर पुलिस ने मिश्रा और भूपेन्द्र सिंह के सैल फ़ोन रिकॉडर्स की जांच की किंतु कुछ प्राप्त नहीं हुआ। भूपेन्द्र सिंह मारे गए दो बजरंग दल के कार्यकर्ताओं में से दूसरा था। कुछ दिन बाद ए.टी.एस ने उनके लैण्ड लाइन फ़ोन के रिकॉडर्स की जांच की, उसमें भी उसे मुम्बई के 2 नम्बर प्राप्त हुए।
नोटः- यह ख़बर भी हमारी नहीं है, जो कुछ 25 अक्तूबर 2008 को प्रकाशित हुआ, हमने सामने रख दिया।18 नवम्बर 2009 (आई।ए।एन.एस)
गोवा धमाके में सनातन संस्था का एक और कार्यकर्ता गिराफ़्तार
दीवाली के मौक़े पर मालेगांव में हुए धमाके के सम्बंध में आत्मरक्षा की ट्रेनिंग देने वाले एक व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ़्तार किया है। स्पष्ट रहे कि उस धमाके में बम ले जा रहे हिन्द ग्रुप के दो कार्यकर्ताओं की मृत्यु हो गई थी।पुलिस कप्तान आत्माराम देश पांडे के अनुसार दिलीप मानागावकर Imprnized Explerive Device (IED) लगाने में संलिप्त था, जो फटी नहीं थी।पंजी से 50 किलो मीटर दूर उत्तर गोवा के धामाशे नामी गांव में मानागावकर सनातन संस्था के लिए स्वैच्छा से आत्मरक्षा की ट्रेनिंग देता था।www.pucl.orgMay 2006
नांदेड़ में एक प्रसिद्ध आर।एस।एस कार्यकर्ता के घर हुए धमाके की रिपोर्ट
घर के बाहर नेम प्लेट पर लक्ष्मीराव राज कोन्डोरकर लिखा था, जो जल संसाधन विभाग में एग्ज़ीक्यूटिव इंजीनियर था। शहर में लोग जानते थे कि वह आर.एस.एस का कार्यकर्ता है और घर के बाहर लॉर्ड राम और हनुमान के बड़े चित्र लगे थे। उस धमाके में लक्ष्मण का 20 वर्षीय पुत्र नरेश राज कोन्डोरकर मारा गया था। मारे गए दूसरे व्यक्ति का नाम हिमांशू वेंक्टेश पन्से था। तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। (1) योगेश रविन्द्र देशपांडे (2)मारूति किशवरवाघा (3) गिरद राज जयराम पन्सेवार छठा व्यक्ति, जो घायल होते हुए भी भागने में सफ़ल रहा। उसका नाम राहुल पांडे था। पुलिस ने पहले 5 लोगों को संलिप्त बताया था, जब घायलों से पूछताछ हुई तब फ़रार राहुल पांडे के सम्बंध में पुलिस को पता चला।
रोज़नामा राष्ट्रीय सहारा-11.02.2010, पृष्ठ-1
कुंभ में धमाका करना चाहते थे आतंकवादी
हरिद्वार में 2 गिरफ़्तार, ज्वलनशील पदार्थ बरामद, आर्थिक सहायता करने वाला आतंकवादी दिल्ली में पकड़ा गयानई दिल्ली देहरादून (पीटीआई), 11 फ़रवरी 2010
पुलिस ने एक ही दिन में दो बड़ी उपलब्धियाँ प्राप्त कीं। एक ओर उसने आतंकवादियों के निशाने पर रहे हरिद्वार कुंभ के दौरान हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर गत सप्ताह ज्वलनशील पदार्थ मिलने के मामले में 2 लोगों को बुध को गिरफ़्तार करके भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ बरामद किया। वहीं दिल्ली पुलिस ने मणिपुर के प्रतिबंधित पीपल्स पूनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट को कथित रूप से आर्थिक सहायता देने वाले एक संदिग्ध आतंकवादी को दक्षिणी दिल्ली से गिरफ़्तार किया। पुलिस सूत्रों के अनुसार उसे मालवीय नगर से गिरफ़्तार किया गया। उसका नाम शेख़ सादिक़ हुसैन उर्फ़ नज़ीर बताया गया है। बताया जाता है कि वह प्रतिबंधित आतंकवादी गिरोह को आर्थिक सहायता प्रदान करता था।उधर हरिद्वार से गिरफ़्तार होने वाले संदिग्ध आतंकवादियों के नाम मनीष कुमार और चंदन प्रधान हैं। यह उड़ीसा के निवासी हैं। गढ़वाल जनपद के आई.जी. एम.ए. गणपति ने बताया कि यह दोनों हरिद्वार में पाइप बनाने वाली एक कम्पनी के कर्मचारी हैं। उन दोनों ने स्वीकार किया कि हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर बम उन्होनें ही रखे थे। पुलिस ने दोनों के घर पर छापा मारा जहां से लगभग डेढ़ किलोग्राम नाइट्रेट से सम्बंधित ज्वलनशील पदार्थ मिला। पुलिस और छानबीन कर रही है।
नोट: उपरोक्त घटनाएं सामने रखने का उद्देश्य केवल इतना है कि संबंधित ज़िम्मेदार अधिकारी, पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियां व भारत सरकार अगर पूरी ईमानदारी के साथ बिना धर्म व जाति में भेद किए आतंकवाद को केवल आतंकवाद की निगाह से देखे, आतंकवाद में संलिप्त व्यक्तियों को चाहे वह कोई भी हो आतंकवाद के समर्थक के रूप में देखे और समय पर कार्रवाई करे तो संभवतः देश का वातावरण बदल जाए और इन बम धमाकों का सिलसिला रुक जाए।
Monday, February 15, 2010
پنے دھماکہ! کیا توجہ ہٹانے کی سازش؟
کل کی تحریر میں، میں نے اپنے ایسے چند مضامین کے عنوانات تاریخ وار بیورے کے ساتھ آپ کی خدمت میں پیش کےے تھے، جو میں نے 26نومبر2008کو ممبئی پر ہوئے دہشت گردانہ حملہ کے بعد اور اس کے چند روز پہلے جب ہیمنت کرکرے مالیگاوں بم بلاسٹ کی تحقیقات کے ذریعہ تقریباً ہر روز ایسے دہشت گردوں کے نام اور چہرے بے نقاب کررہے تھے، جن کا قیاس اس سے پہلے نہیں کیا جاتا تھا۔ ساتھ ہی ہندوستان میں فرقہ پرست تنظیموں کی کارکردگیوں پر بھی میں اس دوران اپنے مضامین کے ذریعہ روشنی ڈال رہا تھا۔ ظاہر ہے کوشش تھی یہ واضح کردینا کہ ہیمنت کرکرے اپنی تفتیش کی معرفت جو کچھ سامنے لارہے ہیں، دراصل وہ ذہنیت بہت پہلے سے کارفرما تھی۔ ہاں، بس ہمارے کسی خفیہ آفیسر نے پوری ایمانداری کے ساتھ اسے منظرعام پر لایا نہیں تھا۔ اب جبکہ میں نے 26/11کے موضوع پر لکھنے کے لےے پھر سے قلم اٹھایا تو مجھے ضروری لگا کہ وہ پس منظر بھی سامنے رکھنا بیحد ضروری ہے، ملک جن حالات سے اس دوران گزر رہا تھا، کیوں کہ اس دہشت گردانہ حملہ میں سب سے پہلے ہیمنت کرکرے، اشوک کامٹے اور وجئے سالسکر شہید ہوئے تو پیچھے مڑ کر یہ دیکھنا بھی ضروری محسوس ہوا کہ ہیمنت کرکرے اس وقت کس طرح کے حالات کا سامنا کررہے تھے، لہٰذا میں اپنی آج کی تحریر میں اپنے پچھلے دو مضامین کے تراشے شامل اشاعت کرنے جارہا ہوں، جو میں نے اپنے پچھلے قسط وار مضمون ”مسلمانان ہند.... ماضی، حال اور مستقبل؟؟؟“ کی 86اور87ویں قسط میں ممبئی پر ہوئے دہشت گردانہ حملہ کے محض دو روز بعد، جبکہ یہ حملہ جاری تھا، یعنی28-30نومبر2008کو لکھے اور اس کے اگلے دن یعنی29نومبراور یکم دسمبر کو شائع کےے گئے، جن سے واضح ہوجائے گا کہ اس دوران شہید ہیمنت کرکرے کو جان سے مارنے کی دھمکیاں دی جارہی تھیں، تاہم قبل اس کے کہ میں اسی سمت میں اپنے مضمون کو آگے بڑھاوں اور یہ تراشے پیش کروں، تازہ واقعات پر بھی ایک نظر ڈالنی ضروری ہے۔ گزشتہ دنوں میں نے اپنی ویب سائٹ پر لکھا تھا کہ ”ہم جنگ نہیں ہونے دیں گے“۔ اس جملہ میں ایک فیصلہ کن عزم تھا۔ دراصل ہم حکومت ہند کو یہ باورکرانا چاہتے تھے کہ پاکستان سے جنگ اس مسئلہ کا حل نہیں ہے، اگر کسی بھی ملک کو دہشت گردانہ واقعات کے بعد حملہ کرکے تباہ کردیا جانا ہی دہشت گردی پر قابو پانے کا واحد راستہ ہوتا تو امریکہ، افغانستان اور عراق کو تباہ کرنے کے بعد دہشت گردی کے خلاف اس جنگ میں خود کو فاتح قرار دے دیتا، اپنی فوجیں واپس بلا لیتا اور یہ اعلان کردیتا کہ ہم نے دہشت گردی کے خلاف جنگ جیت لی ہے۔ دہشت گردوں کے تمام اڈے تباہ کردئےے ہیں۔ اب امریکہ ہی نہیں، پوری دنیا کو چین کی سانس لینے کا موقع ملے گا، لیکن آپ دیکھ رہے ہیں کہ امریکہ متواتر دہشت گردی کے خلاف جنگ کو جاری رکھنے کی بات کررہا ہے، یعنی وہ ابھی تک افغانستان اور عراق کے خلاف طویل جنگ کے باوجود اپنے مقصد میں کامیاب نہیں ہے، جو اس بات کا اعتراف ہے کہ جنگوں کے بعد بھی دہشت گردی جاری ہے، پھر بھی یہ کوئی ڈھکی چھپی بات نہیں ہے کہ امریکہ اب پاکستان کو جنگ کی طرف دھکیلنا چاہتا ہے۔ ایک طرف پاکستان خود دہشت گردانہ حملوں سے تباہ ہورہا ہے تو دوسری طرف امریکہ چاہتا ہے کہ ہندوستان پاکستان پر حملہ کرے اور اسے پوری طرح تباہ کردے، تاکہ اس خطہ میں جنگ اور بدامنی کا ماحول اور بھی زیادہ شدت اختیار کرلے۔ اس کی یہ منشا جگ ظاہر ہے، وہ کھلے عام ہندوستان کے حکمرانوں سے ایسا کہتا رہا ہے۔ یہ تو وہ باتیں تھیں، جنہیں آپ کے سامنے رکھنے کا مقصد صرف یہ تھا کہ آپ حالات حاضرہ سے واقف رہیں اور اب اگلی بات میں آپ کی خدمت میں عرض کرنے جارہا ہوں، آپ کا ذہن اس کو سننے اور سمجھنے کے لےے تیار ہوجائے۔ یہ آپ کے علم میں ہے کہ 26نومبر2008کو ممبئی پر ہوئے دہشت گردانہ حملہ کے تعلق سے انکشافات کی پرتیں اب کھلنے لگی ہیں۔ نومبر-دسمبر2008میں تو ہم نے اتنا ہی خدشہ ظاہر کیا تھا کہ بات صرف ان 10دہشت گردوں تک محدود نہیں ہے، جن کو بار بار سامنے رکھ کر اس فائل کو بند کردینے کی کوشش کی جارہی ہے، بلکہ سازش بہت گہری ہے۔ ہمیں نہ اس وقت پاکستان سے کوئی ہمدردی تھی اور نہ آج پاکستان سے کوئی ہمدردی ہے، ہمیں فکر ہے تو اپنے ملک کی، اپنے عوام کی۔ اگر ہم دہشت گردی کے واقعات کی تہہ تک نہیں پہنچیں گے، اصل مجرموں تک نہیں پہنچیں گے تو دہشت گردی پر قابو پانا ہمارے لےے مشکل ہی نہیں، بلکہ ناممکن ہوگا، جبکہ ہمیں ہر حال میں اسے ممکن بنانا ہے۔ ہماری تحریریں اس بات کی گواہ ہیں کہ جو خدشات ہم نے اس وقت سامنے رکھے تھے، جو اشارے اس وقت ہم نے کےے تھے، اب وہ سچائیاں سامنے آنے لگی ہیں۔ ممبئی پر ہوئے دہشت گردانہ حملہ کے سلسلہ میں ڈیوڈ کولمین ہیڈلی کی گرفتاری، ایف بی آئی سے اس کا تعلق، تہورحسین رانا اور ڈیوڈ ہیڈلی کے ایک ہی ہفتہ میں پاسپورٹ بنائے جانے کا معاملہ، ہیڈلی کا امریکی شہری کی حیثیت سے فرضی ولدیت کے ساتھ امریکہ کی جانکاری میں بار بار ہندوستان کا دورہ کرنا، اس کے ہند-پاک دوروں کے آس پاس ہندوستان اور پاکستان میں بم دھماکوں کا ہونا، ڈیوڈ کولمین ہیڈلی کا امریکہ خفیہ ایجنسی ایف بی آئی کے لےے کام کرنے کا انکشاف ہونا، ہیڈلی سے پوچھ گچھ کے معاملہ میں امریکہ افسران کا ہندوستانی خفیہ ایجنسیوں کے ساتھ تعاون نہ کرنا، اس بات کا واضح اشارہ ہے کہ ’کچھ تو ہے، جس کی پردہ داری ہے‘۔ امریکہ نہیں چاہتا کہ ہندوستان کے خفیہ محکمہ کے افسران کو وہ مواقع فراہم کرے، جس سے کہ وہ ان حملوں کی حقیقت تک پہنچ سکیں۔ اس لےے اس نے مکمل انتظام کرلیا ہے کہ ہیڈلی پر امریکہ میں اتنے لمبے عرصہ تک مقدمہ چلے گا کہ ہندوستان کو اس سے بات چیت کرنے اور ان دہشت گردانہ حملوں میں اس کے کردار اور امریکہ خفیہ ایجنسی کا اگر کوئی تعلق ہے تو اس حقیقت کو جاننے کا موقع نہ ملے۔ ساتھ ہی امریکہ چاہتا ہے کہ ہندوستان پاکستان پر حملہ کردے، تاکہ پوری دنیا پر واضح ہوجائے کہ ہندوستان پر اس دہشت گردانہ حملہ کے پیچھے پاکستان اور اس کی دہشت گرد تنظیموں کا ہاتھ تھا۔ اب اسے نئے نئے انکشافات کے سامنے آنے کی وجہ کہئے یا پھر ہندوستان کے سب سے مقبول اردو روزنامہ ”راشٹریہ سہارا“ کی مسلسل تحریک کا نتیجہ کہئے کہ امریکہ ابھی تک اپنے اس مقصد میں کامیاب نہیں ہوا۔ میں نے روزنامہ راشٹریہ سہارا کا نام لے کر صاف طور پر ذکر اس لےے کیا کہ آج یہ اخبار ہندوستان کے ایک بہت بڑے طبقہ کے جذبات کی نمائندگی کرتا ہے، یہ بات حکومت ہند بھی جانتی ہے اور سچ تو یہ ہے کہ امریکی حکومت بھی جانتی ہے، لہٰذا ہند-پاک کے درمیان جنگ تو نہیں ہوئی، جس سے کہ 26/11کے دہشت گردانہ حملوں اور اس سلسلہ میں ہونے والی تفتیش سے توجہ ہٹ پاتی، مگر ایک اور دہشت گردانہ حملہ پنے میں ضرور ہوگیا۔ نہیں میں اسے ممبئی کے دہشت گردانہ حملوں سے لنک نہیں کررہا ہوں۔ میں یہ بھی نہیں کہہ رہا ہوں کہ توجہ کو دوسری طرف موڑنے کی یہ ایک سازش بھی ہوسکتی ہے۔ کیا ہوسکتا ہے اور کیا نہیں ہوسکتا، یہ جاننے کی کوشش کرنا اور اسے منظرعام پر لانا ہماری خفیہ ایجنسیوں کا کام ہے، جو انہیں ہی کرنا ہے اور وہ کربھی رہی ہوں گی۔ ہاں،مگر ایک ذمہ دار شہری کے ناطے ہماری فکر بھی اپنی جگہ واجب ہے۔ اس وقت اگر ہم یہ سوچ رہے ہیں کہ دہشت گردوں نے پنے میں ایسی جگہ کو کیوں منتخب کیا، جہاں غیرملکیوں کی ہلاکتیں بھی یقینی تھیں تو اسے قطعاً غیرضروری قرار نہیں دیا جاسکتا۔ کیا دہشت گرد چاہتے تھے کہ ہندوستان میں ایسا دہشت گردانہ حملہ ہو، جس میں کچھ غیرملکی بھی مارے جائیں، تاکہ امریکہ کو پھر سے دہشت گردی کے تعلق سے بولنے کا جواز حاصل ہو، اسے یہ موقع ملے کہ ہندوستانی حکومت پر اپنی سوچ کے نفاذ کے لےے دباﺅ ڈالے، اگر ایسا ہے تو دہشت گردوں کی یہ منشا کس کے لےے اور کیوں ہوسکتی ہے؟ یہ جاننا اور سمجھنا بھی ضروری ہے۔اس دہشت گردانہ حملے میں امونیم نائٹریٹ کا استعمال کیا گیا، میرے ہاتھ میں اس وقت ان خبروں کے تراشے ہیں، جن سے واضح ہوتا ہے کہ گزشتہ ایک ڈیڑھ برس میں امونیم نائٹریٹ اور دہشت گردی کے لےے استعمال ہونے والا دیگر مادّہ کب کب، کہاں کہاں سے، کس کس کے پاس برآمد ہوا۔ یہ تفصیل اور اس ضمن میں گفتگو کا سلسلہ کل بھی جاری رہے گا، لیکن میں نے اپنے مضمون کی ابتدا میں چونکہ ہیمنت کرکرے کو ملنے والی موت کی دھمکیوں کے تعلق سے اپنے جن مضامین کا حوالہ دیا تھا، ان کی چند سطریں بھی پیش کرنا ضروری ہیں اور آگے بھی یہ سلسلہ کچھ اسی طرح چلے گا کہ بات کچھ حالات حاضرہ پر ہوگی اور کچھ ماضی کا وہ پس منظر بھی ہم سامنے رکھتے چلیں گے، تاکہ ہم سمجھ سکیں کہ آج جو ہورہا ہے، کیا اس کا تعلق اس سے بھی ہے، جو کل ہوا تھا؟ شاید یہ ہمارے آنے والے کل کو بہتر بنانے میں کارگر ثابت ہو۔ اب وہ تراشے:
قسط-86، 29.11.2008
مالیگاوں بم دھماکوں کی تفتیش اور ممبئی دہشت گردانہ حملوں کا کیا کوئی تعلق ہے؟اس حقیقت کا پتہ لگانا ضروری ہے
-پولس نے اس بات کی تصدےق کردی ہے کہ چےف کے گھر کو اڑانے کی دھمکی ملی ہے۔پُنے : اےک نامعلوم کالر (فون کرنے والے)، جس نے پُنے پولس سے رابطہ قائم کرنے کے لےے PCO کا استعمال کےا، ممبئی اے ٹی اےس چےف کے گھر کو ”اگلے چند دنوں مےں“ اڑانے کی دھمکی دی تھی۔ اس بات کی تصدےق اےک سینئر پولس افسر نے کی ہے۔فون کرنے والا مراٹھی زبان مےں بات کر رہا تھا اور اس نے 24 نومبر کی شام کو ےہ دھمکی دےنے کے بعد فون کاٹ دےا تھا۔ جوائنٹ کمشنر آف پولس، راجندر سوناونے نے اس بات کی تصدےق کی۔ بعد مےں پولس کمشنر نے ےہ بھی بتاےا کہ پولس نے فون بوتھ کا پتہ لگاےا تو ےہ اسی شہر کا نکلا۔ان سے جب ےہ پوچھا گےا کہ کےا ےہ اےک ’فرضی کال‘ تھا، سوناونے نے بتاےا کہ موجودہ صورت حال کے مد نظر پولس اس قسم کی تمام کال کو سنجےدگی سے لے رہی ہے اور ATS کو اس کے بارے مےں اطلاع دے دی گئی تھی۔اے ٹی اےس چےف کو دھمکی بھرا فون : مجرم کا پتہ لگانے کے لےے جانچ شروع کی گئی تھی28 نومبرکو پنے پولس نے اس نامعلوم فرد کی کھوج بےن شروع کردی تھی، جس نے اے ٹی اےس چےف، ہےمنت کرکرے کے گھر کو اڑانے کی دھمکی ٹےلی فون کال کے ذرےعے 24نومبر کو پولس کنٹرول روم کو دی تھی۔کرکرے کو اےک دہشت گردانہ حملے مےں ممبئی مےں قتل کر دےا گےا۔جوائنٹ کمشنر آف پولس راجندر سوناونے (لاء اےنڈ آرڈر) نے بتاےا کہ اےک نامعلوم شخص نے 5।20 بجے شام کو کنٹرول روم کو فون کرکے کرکرے کو دو تےن دن کے اندر جان سے مارنے کی دھمکی دی تھی۔ سوناونے نے بتاےا کہ فون کرنے والا مراٹھی زبان مےں بات کر رہا تھا اور اس نے فوراً ہی فون کاٹ دےا۔تحقےقات سے پتہ چلا ہے کہ ےہ کال فون نمبر 24231375 سے کی گئی تھی، جو کہ سہاکارنگر کے اےک پی سی او بوتھ کا ہے۔ یہ بوتھ کانا رام چودھری کا ہے جوسہاکارنگر کی سارنگ سوسائٹی مےں کوہِ نور نام سے اےک جنرل اسٹور کی دکان چلاتا ہے۔ دتاوڑی پولس اسٹےشن کے سےنئر پولس انسپکٹر اُتم مورے نے بتاےا کہ چودھری کے خلاف دستورِ ہند کے سےکشن 188 کے تحت (پولس کی بات نہ ماننے پر) اےک معاملہ درج کر لےا گےا تھا۔ سٹی کنٹرول روم کی ہداےت ملنے پر اس بابت معاملہ درج کےا گےا تھا۔
قسط-87، 01.12.2008
کرکرے کے بعد بھی کیا بے نقاب ہوپائیں گے سفید پوش دہشت گرد؟کرکرے اڈوانی کے الزام سے صدمے میں تھے: جولیوربیرو
ہےمنت کرکرے گزشتہ منگل کو مجھ سے ملاقات کے لئے آئے تھے۔ایل کے اڈوانی کے اس الزام نے انہےں کافی صدمہ سے دوچارکیا کہ ان کی قیادت میں انسداد دہشت گردی اسکواڈ (اے ٹی ایس) مالیگاﺅں بم بلاسٹ کےس میں سیاسی اثر اورغیر پےشہ ورانہ انداز میں کام کررہا ہے۔ انہوںنے وضاحت کی کہ اے ٹی ایس نے سادھوی پرگیہ سنگھ کے خلاف ٹھوس اور پختہ ثبوت اکٹھا کئے ہےں اور تحقیقات کا میابی سے ہم کنار ہے۔اڈوانی جیسے سینئر اور تجربہ کار سیاستداں کے ہندوتو کے علمبردار بننے والوں کے ساتھ مل کرالزام لگانے نے انہیں حیرت زدہ کردیا تھا۔
पुने धमाका! क्या तवज्जह हटाने की साज़िश?
कल के लेख में मैंने अपने कुछ ऐसे लेखों के शीर्षक तारीख़वार ब्योरे के साथ आपकी सेवा में पेश किए थे, जो मैंने 26 नवम्बर 2008 को मुम्बई पर हुए आतंकवादी हमले के बाद और उसके कुछ दिन पूर्व जब हेमन्त करकरे मालेगांव बम ब्लास्ट की जांच के द्वारा लगभग हर रोज़ ऐसे आतंकवादियों के नाम और चेहरे बेनक़ाब कर रहे थे जिनका अनुमान इससे पहले नहीं किया जाता था। साथ ही भारत में साम्प्रदायिक संगठनों की गतिविधयों पर भी मैं इस बीच अपने लेखों के द्वारा रौशनी डाल रहा था। ज़ाहिर है प्रयास था यह स्पष्ट कर देना कि हेमन्त करकरे अपनी जांच के माध्यम से जो कुछ सामने ला रहे हैं वास्तव में वह मानसिकता बहुत पहले से मौजूद थी। हां बस हमारे किसी ख़ुफ़िया अधिकारी ने इसे जनता के सामने पेश नहीं किया था।अब जबकि मैंने 26/11 के विषय पर लिखने के लिए फिर से क़लम उठाया तो मुझे आवश्यक लगा कि वह पृष्ठभूमि भी सामने रखना बहुत ज़रूरी है, देश जिन हालात से उस दौरान गुज़र रहा था, क्योंकि इस आतंकवादी हमले में सबसे पहले हेमन्त करकरे, अशोक काम्टे और विजय सलास्कर शहीद हुए तो पीछे मुड़ कर यह देखना भी ज़रूरी महसूस हुआ कि हेमन्त करकरे उस समय किस तरह की परिस्थितियों का सामना कर रहे थे। अतः मैं अपने आज के लेख में अपने पिछले दो लेखों के कुछ भाग प्रकाशित करने जा रहा हूं। जो मैंने अपने पिछले किस्तवार लेख ‘‘मुसलमानाने हिंद माज़ी हाल और मुस्तक़बिल???’’ की 86 वीं व 87 वीं क़िस्त में मुम्बई पर हुए आतंकवादी हमले के केवल दो दिन बाद, जबकि यह हमला जारी था, अर्थात 28 नवम्बर और 30 नवम्बर 2008 को लिखे और उसके अगले दिन अर्थात 29 नवम्बर व 01 दिसम्बर को प्रकाशित किए गए, जिससे स्पष्ट हो जाएगा कि इस बीच शहीद हेमन्त करकरे को जान से मारने की धमकियां दी जा रही थीं। लेकिन इससे पहले कि मैं इस दिशा में अपने लेख को आगे बढ़ाऊं और पुराने लेख की वह लाइनें पेश करूं ताज़ा घटनाओं पर भी एक नज़र डालनी ज़रूरी है। पिछले दिनों मैंने अपनी वैबसाइट पर लिखा था कि ‘‘हम जंग नहीं होने देंगे।’’ इस वाक्य में एक निर्णायक सन्देश था। वास्तव में हम भारत सरकार को यह अहसास दिलाना चाहते थे कि पाकिस्तान से जंग इस समस्या का हल नहीं है, अगर किसी भी देश को आतंकवादी घटनाओं के बाद हमला करके तबाह कर दिया जाना ही आतंकवाद पर क़ाबू पाने का अकेला रास्ता होता तो अमेरिका अफ़गानिस्तान और इराक़ को तबाह करने के बाद आतंकवाद के ख़िलाफ इस लड़ाई में स्वयं को विजयी क़रार दे देता, अपनी फौजें वापस बुला लेता और यह घोषणा कर देता कि हमने आतंकवाद के विरुद्ध जंग जीत ली है। आतंकवादियों के तमाम अड्डे तबाह कर दिए हैं। अब अमेरिका ही नहीं पूरी दुनिया को चैन का सांस लेने का अवसर मिलेगा। अब आप देख रहे हैं कि अमेरिका आतंकवाद के विरुद्ध जंग को जारी रखने की बात कर रहा है। यानी वह अभी तक अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ के विरुद्ध लम्बी लड़ाई के बावजूद अपने उद्देश्य में सफल नहीं है, जो इस बात की स्वीकारोक्ति है कि जंगों के बाद भी आतंकवाद जारी है। फिर भी यह कोई ढकी छुपी बात नहीं कि अमेरिका अब पाकिस्तान को जंग की तरफ़ घकेलना चाहता है। एक तरफ़ पाकिस्तान स्वयं आतंकवादी हमलों से तबाह हो रहा है तो दूसरी तरफ़ अमेरिका चाहता है कि भारत पाकिस्तान पर हमला करे और उसे पूरी तरह तबाह कर दे, ताकि इस क्षेत्र में जंग और अशांति का माहौल और भी ज़ोर पकड़ ले। उसकी यह इच्छा जग ज़ाहिर है। वह खुलेआम भारत के शासकों से ऐसा कहता रहा है।यह तो वह बातें थीं जिन्हें आपके सामने रखने का उद्देश्य केवल यह था कि आप वर्तमान परिस्थितियों से अनभिज्ञ न रहें और अब अगली बात जो मैं आपकी सेवा में कहने जा रहा हूं, आपका दिमाग़ इसको सुनने और समझने के लिए तैयार हो जाए। यह आपकी जानकारी में है कि 26 नवम्बर 2008 को मुम्बई पर हुए आतंकवादी हमले के संबंध में रहस्योदघाटनों की पर्तें अब खुलने लगी हैं। नवम्बर, दिसम्बर 2008 में तो हमने बस इतना ही संदेह व्यक्त किया था कि बात केवल उन 10 आतंकवादियों तक सीमित नहीं है जिनको बार बार सामने रख कर इस फाइल को बंद कर देने का प्रयास किया जा रहा है, बल्कि साज़िश बहुत गहरी है। हमें न उस समय पाकिस्तान से कोई हमदर्दी थी और न आज पाकिस्तान से हमदर्दी है, हमें चिंता है तो अपने देश की अपनी जनता की। अगर हम आतंकवादी घटनाओं की तह तक नहीं पहुंचेंगे, वास्तविक अपराधियों तक नहीं पहुंचेंगे तो आतंकवाद पर क़ाबू पाना हमारे लिए कठिन ही नहीं असम्भव होगा। जबकि हमें हर स्थिति में इसे संभव बनाना है। हमारे लेख इस बात के गवाह हैं कि जो शंकाएं हमने उस समय सामने रखी थीं, जो इशारे उस समय हमने किए थे अब वह सच्चाईयां सामने आने लगी हैं। मुम्बई पर हुए आतंकवादी हमले के सिलसिले में डेविड कोलमेन हेडली की गिरफ़तारी, एफबीआई से उसका संबंध, तहव्वुर हुसैन राना और डेविड हेडली के एक ही सप्ताह में पासपोर्ट बनाए जाने का मामला, हेडली का अमेरिकी नागरिक की हैसियत से फ़र्ज़ी पैतृकता के साथ अमेरिका की जानकारी में बार-बार भारत का दौरा करना, उसके भारत पाक दौरों के आस-पास भारत और पाकिस्तान में बम धमाकों का होना, डेविड कोलमेन हेडली का अमेरिकी ख़ुफ़िया ऐजंसी एफबीआई के लिए काम करने का रहस्योदघाटन होना, हेडली से पूछताछ के मामले में अमेरिकी अधिकारियों का भारतीय ख़ुफ़िया ऐजंसियों के साथ सहयोग न करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ‘कुछ तो है, जिसकी पर्दादारी है।’ अमेरिका नहीं चाहता कि भारत के ख़ुफ़िया महकमे के अधिकारीयों को वह अवसर दे जिससे कि वह इन हमलों की वास्तविकता तक पहुंच सकें। इसलिए उसने पूरा प्रबंध कर लिया है कि हेडली पर अमेरिका में इतने लम्बे समय तक मुक़दमा चलेगा कि भारत को उससे बातचीत करने और उन आतंकवादी हमलों में उसकी भूमिका और अमेरिकी ख़ुफ़िया ऐजंसी का कोई संबंध है तो उस वास्तविकता को जानने का अवसर न मिले। साथ ही अमेरिका चाहता है कि भारत पाकिस्तान पर हमला कर दे ताकि पूरी दुनिया पर यह स्पष्ट हो जाए कि भारत पर इस आतंकवादी हमले के पीछे पाकिस्तान और उसके आतंकवादी संगठनों का हाथ था। अब इसे नए-नए रहस्योदघाटनों के सामने आने का कारण कहिये या फिर भारत के सबसे लोकप्रिय उर्दू रोज़नामा राष्ट्रीय सहारा के लगातार लेखों का परिणाम कि अमेरिका अभी तक अपने इस उद्देश्य में सफल नहीं हुआ। मैंने स्पष्ट रूप से रोज़नामा राष्ट्रीय सहारा का नाम लेकर उल्लेख इसलिए किया कि आज यह अख़बार भारत के बहुत ब़ड़े वर्ग की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। यह बात भारत सरकार भी जानती है और सच तो यह है कि अमेरिकी सरकार भी जानती है। अतः भारत पाक के बीच जंग तो नहीं हुई जिससे 26/11 के आतंकवादी हमलों और इस सिलसिले में होने वाली जांच से ध्यान हट पाता, परन्तु एक और आतंकवादी हमला पुणे में अवश्य हो गया। नहीं मैं इसे मुम्बई के आतंकवादी हमलों से लिंक नहीं कर रहा हूं। मैं यह भी नहीं कह रहा हूं कि ध्यान को दूसरी तरफ मोड़ने की यह एक साज़िश भी हो सकती है। क्या हो सकता है और क्या नहीं हो सकता यह जानने का प्रयास करना और इसे जनता के सामने लाना हमारी ख़ुफ़िया एजेंसियों का काम है, जो उन्हें ही करना है और वह कर भी रही होंगी। हां मगर एक ज़िम्मेदार नागरिक के नाते हमारी चिंता भी अपनी जगह वाजिब है। इस समय अगर हम यह सोच रहे हैं कि आतंकवादियों ने पुणे में ऐसी जगह को क्यों चुना जहां विदेशियों का हमले का शिकार होना भी यक़ीनी था तो इसे बिल्कुल बेवजह क़रार नहीं दिया जा सकता। क्या आतंकवादी चाहते थे कि भारत में ऐसा आतंकवादी हमला हो जिसमें कुछ विदेशी भी मारे जाएं ताकि अमेरिका को फिर से आतंकवादियों के संबंध में बोलने का औचित्य मिल जाए, उसे यह अवसर मिले कि भारत सरकार पर अपनी सोच को लागू करने के लिए दबाव डाले। अगर ऐसा है तो आतंकवादियों की यह मन्शा किसके लिए और क्यों हो सकती है? यह जानना और समझना भी आवश्यक है। इस आतंकवादी हमले में विस्फ़ोटक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया, मेरे हाथ में इस समय उन ख़बरों की कटिंग्स हैं, जिनसे स्पष्ट होता है कि पिछले एक डेढ़ वर्ष में अमोनियम नाइट्रेट व आतंकवादी हमलों के लिए प्रयोग होने वाले अन्य पदार्थ कब-कब कहां-कहां से किसके पास बरामद हुए। यह विवरण और इस संदंर्भ में बातचीत का सिलसिला कल भी जारी रहेगा, लेकिन मैंने अपने लेख के शुरू में हेमन्त करकरे को मिलने वाली मौत की धमकियों के संबंध में अपने जिन लेखों का हवाला दिया था अतएव लेख समाप्त करने से पूर्व ऐसी कुछ पंक्तियां पेश करना ज़रूरी है और आगे भी यह सिलसिला कुछ इस तरह चलेगा कि बात कुछ तो वर्तमान परिस्थितयों पर होगी और कुछ पूर्व की वह पृष्ठभूमि भी हम सामने रखते चलेंगे ताकि हम समझ सकें कि आज जो हो रहा है क्या उसका संबंध उससे भी है जो कल हुआ था? संभवतः यह हमारे आने वाले कल को बेहतर बनाने में कारगर साबित हो। अब वह भाग।
क़िस्त-86, 29।11।2008
मालेगांव धमाकों की जांच और मुम्बई आतंकवादी हमलों का क्या कोई संबंध है?-इस सच्चाई का पता लगाना होगा
पुलिस ने इस तथ्य की पुष्टि कर दी है कि ए।टी।एस प्रमुख के घर को उड़ाने की धमकी मिली हैपुणेः एक नामालूम कॉलर (फोन करने वाले), जिसने पुणे पुलिस से सम्बंध स्थापित करने के लिए पी.सी.ओ. का प्रयोग किया, ने मुम्बई ए.टी.एस प्रमुख के घर को ‘आगामी कुछ दिनों में’ उड़ाने की धमकी दी थी। इस बात की पुष्टि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने की है।फोन करने वाला मराठी भाषा में बात कर रहा था और उसने 24 नवम्बर की शाम को यह धमकी देने के पश्चात फोन काट दिया था। उपायुक्त पुलिस राजेन्द्र सोनावने ने इस बात की पुष्टि की। बाद में पुलिस आयुक्त ने यह भी बताया कि पुलिस ने फोन बूथ का पता लगाया तो यह इसी शहर का निकला। उनसे जब यह पूछा गया कि क्या यह एक ‘फर्ज़ी कॉल था? सोनावने ने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में पुलिस इस प्रकार की सभी काल्स को गम्भीरता पूर्वक ले रही है और ए.टी.एस को इस सम्बंध में सूचना दे दी गई थी।ए.टी.एस प्रमुख को धमकी भरा फोन: आरोपी का पता लगाने हेतु जांच प्रारम्भ की गई थी28 नवम्बर को पुणे पुलिस ने इस नामालूम व्यक्ति की छानबीन शुरू कर दी है जिसने ए.टी.एस प्रमुख हेमन्त करकरे के घर को उड़ाने की धमकी टेलीफोन कॉल के द्वारा 24 नवम्बर को पुलिस कंट्रोल रूम को दी थी। करकरे की एक आतंकवादी घटना में मुम्बई में हत्या कर दी गई।उपायुक्त पुलिस, राजेन्द्र सोनावने (नियम व कानून) ने बताया कि एक नामालूम व्यक्ति ने सांय 5.20 बजे कंट्रोल रूम को फोन करके करकरे को दो-तीन दिन के भीतर जान से मारने की धमकी दी थी। सोनावने ने बताया कि फोन करने वाला मराठी भाषा में बात कर रहा था और उसने तत्काल ही फोन काट दिया। छानबीन से पता चला है कि ये काल फोन नम्बर 24231375 से की गई थी जो कि सहाकार नगर के एक पी.सी.ओ. बूथ का है। यह बूथ कानाराम चैधरी का है, जो सहाकार नगर की सारंग सोसाइटी में कोहेनूर नामक एक जनरल स्टोर की दुकान चलाता है। पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस इंस्पैक्टर उत्तम मोरे ने बताया कि चैधरी के विरूद्ध भारतीय संविधान की धारा 188 के अन्र्तगत (पुलिस की बात न मानने पर) एक मामला दर्ज कर दिया गया है। सिटी कंट्रोल रूम का निर्देश मिलने पर इस सम्बंध में मामला दर्ज किया गया था।
क़िस्त-87, 01.12.2008
करकरे के बाद भी क्या बेनक़ाब हो पाएंगे सफ़ेदपोश दहशतगर्द?करकरे अडवाणी द्वारा लगाए गए आरोप से दुखी थेः जुलियू रिबैरो
हेमंत करकरे पिछले मंगलवार को मुझसे मिलने के लिए आए थे। एल.के.आडवाणी के इस आरोप ने उन्हें बहुत दुख पहुँचाया था कि उनके नेतृत्व में ए.टी.एस, मालेगांव बम धमाकों के केस में राजनीतिक प्रभाव और अव्यवहारिक ढंग में कार्य कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया था कि ए.टी.एस ने साध्वी प्रज्ञा सिंह के विरूद्ध ठोस और पक्के सबूत एकत्रित किऐ हैं और जांच सफल होने वाली है। आडवाणी जैसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता के हिन्दुत्व के झंडा बरदार बनने वालों के साथ मिल कर आरोप लगाने ने उन्हें आश्चर्यचकित कर दिया था।
اس وقت کے حالات اور واقعات بھی کچھ کہتے ہیں، سنئے تو!
جیسا کہ میں نے کل کے مضمون میں عرض کیا تھا کہ میرے ہاتھ میں قسط وار مضامین ”مسلمانانِ ہند....ماضی، حال اور مستقبل؟؟؟“ کی فائل ہے اور میں ممبئی بم دھماکوں کے دوران اور اس سے قبل کے حالات و واقعات کا مطالعہ کررہا ہوں۔ اس لحاظ سے اگر ہم یکم نومبر 2008سے یکم جنوری2009تک کے تقریباً دوماہ کے حالات پر نظر ڈالیں تو بہت کچھ کڑیاں جڑنے لگتی ہیں، اس وقت کا ماحول سامنے آنے لگتا ہے۔ ارادہ تھا کہ آج کے اس مضمون میں، میں کم ازکم اس دوران لکھے گئے تمام مضامین کے عنوانات اپنے قارئین کی خدمت میں پیش کرسکوں گا، مگر جگہ کی تنگی کے باعث یہ ممکن نہیں ہوپارہا ہے اور میں 21دسمبرتک شائع مضامین کے عنوانات ہی آج کے اس مختصر مضمون کے ساتھ شامل اشاعت کرپارہا ہوں، باقی کے لےے ہمیں کل تک انتظار کرنا پڑے گا اور دوسری مجبوری یہ بھی ہے کہ میں وزیرداخلہ کے 4فروری کو دئےے گئے بیان کی روشنی میں اپنی تحریر کو آج جس طرح آگے بڑھانا چاہتا تھا، وہ ارادہ بھی کل تک کے لےے ملتوی کرنا پڑرہا ہے، اس لےے کہ اس حوالے کے ساتھ تو بات کل کے مضمون میں بھی کی جاسکتی ہے،مگر ان عنوانات کو سامنے رکھنا ضروری ہے، تاکہ یہ اندازہ ہوسکے کہ جب 26نومبر2008کو ممبئی کے راستے ہندوستان پر دہشت گردانہ حملہ ہوا تو ملک کے حالات کیا تھے؟ دہشت گردی کے تعلق سے ملک کی فضا کیا تھی؟ شہید ہیمنت کرکرے کے ذریعہ کس طرح کے انکشافات منظرعام پر آرہے تھے؟ فرقہ پرست طاقتوں کی بے چینی کا عالم کیا تھا؟ روزنامہ راشٹریہ سہارا ان تمام حالات کی منظرکشی کس طرح کررہا تھا؟ کیوں کہ یہ سب اب ایک تاریخ کا حصہ ہے، نہ اسے کوئی مٹا سکتا ہے، نہ بدل سکتا ہے، لہٰذا ہمیں اس دہشت گردانہ حملہ کے پہلے اور بعد کے حالات پر نہ صرف ایک نظر ڈالنی ہوگی، بلکہ بہت گہرائی سے مطالعہ کرنا ہوگا۔ اس لےے کہ دہشت گردی ہمارے ملک اور ہندوستانی عوام کے لےے کوئی ایسا مسئلہ نہیں ہے کہ اسے محض سرسری نگاہ سے دیکھا جائے اور درگزر کردیا جائے۔ میں حالات حاضرہ اور اس دہشت گردانہ حملہ کے تعلق سے ہونے والے نئے نئے انکشافات کے ساتھ ساتھ ان تمام واقعات کو بھی قارئین کے گوش گزار کردینا انتہائی ضروری سمجھتا ہوں، تاکہ سند رہے اور جب 26/11کو ہوئے دہشت گردانہ حملہ کے سلسلہ میں ہم کسی آخری نتیجہ پر پہنچ رہے ہوں تو یہ بھی ذہن نشین رہے کہ کہیں ہم نے کچھ حقائق کو نظرانداز تو نہیں کردیا ہے۔ تمام سچائی کو منظرعام پر لانے کے لےے ہم سے کوئی چوک تو نہیں ہوگئی ہے، اس لےے کہ آج ملک کو درپیش سب سے بڑا مسئلہ ”دہشت گردی“ ہے اور اگر اس معاملے میں ہم سے ایک چھوٹی سی چوک بھی ہوجاتی ہے تو آنے والے کل میں ہماری آئندہ نسلوں کو اس کا بڑا خمیازہ بھگتنا پڑسکتا ہے۔ یہی وجہ ہے کہ میں اس تحریر کو آگے بڑھانے سے قبل ضروری سمجھتا ہوں کہ آپ ایک نظر اس وقت کے حالات اور واقعات پر ڈالیں، تاکہ جب میں اس پس منظر کی روشنی میں بات کررہا ہوں تو واقعات کے تسلسل کو سمجھنے میں اور سچائی کی تہہ تک جانے میں کسی طرح کی دشواری نہ ہو۔
قسط-59،یکم نومبر2008کانپور پولس اور اتر پردیش سرکار بتائے کہ راجیو نگر بم دھماکوں کی حقیقت کیا ہے
قسط-60، 2نومبر2008ہوسکتا ہے آسام میں بم دھماکے انڈین مجاہدین نے ہی کئے ہوںپر کیا انڈین مجاہدین بجرنگ دل کا ہی کوڈنیم ہے!
قسط-61،3نومبر2008انڈین مجاہدین کے نام سے بھیجا گیا ایس ایم ایس فرضی تھااب بتاو ¿ آسام بم دھماکوں کا اصل مجرم کون ہے؟
قسط-62،4نومبر2008سازش بہت گہری ہے فرقہ پرستوں کی- لیکن اب پردہ اٹھنے لگا ہے
قسط-63،5 نومبر2008جمعیة علماءہند -مقدمے کی یہ آگ ہم تک بھی پہنچے گی امید نہ تھی
قسط-64،6 نومبر2008’سارے مسلمان دہشت گرد نہیں، پر سارے دہشت گرد مسلمان ہیں‘کیا اب بھی یہی کہیں گے اڈوانی جی!
قسط-65،7نومبر2008سنگھ پریوار کی دین ہیںفوج میں ملک دشمن عناصر
قسط-66،8 نومبر2008میرا بیٹا گزشتہ 9 ماہ سے جیل میں قید تنہائی میں تھا پھر اسے چند ماہ قبل ہوئے دھماکوں کے سلسلہ میں کیسے گرفتار کیا جاسکتا ہے؟
قسط-67،9نومبر2008پروہت نے مانا وہی ماسٹر مائنڈ-پر کیا صرف مالیگاو ¿ں بم دھماکوں کا یا انڈین مجاہدین کا بھی!
قسط-68،10 نومبر2008حیدرآباد بم دھماکوں کی نئے سرے سے جانچکرے گی نئے نئے انکشافاتقسط-69،11 نومبر2008حیدرآباد جمعےة علماءہند کا تاریخ ساز جلسہ وزےر اعلیٰ کی بھےنسہ اور وٹولی واقعات کی سی بی آئی انکوائری کی ےقےن دہانی
قسط-70،12 نومبر2008سادھوی پرگیہ سنگھ ٹھاکر کا مقدمہ لڑیں گے بال ٹھاکرےاور عاطف، ساجد و مفتی ابوالبشر کامقدمہ....؟
قسط-71،14نومبر2008روزنامہ راشٹریہ سہارا تو ابابیلوں کے مانند ہے-اور سامنے ابرہہ کا لشکرہےقسط-72،15 نومبر2008سنگھ پریوار کی ایما پر نصابی کتابوں میں زہرافشانی-معصوم ذہنوں کو گمراہ کرنے کی منظم سازش
قسط- 73،16 نومبر2008سنگھ پریوار کا نیا شگوفہ-’دہلی کا قطب مینار قطب الدین ایبک نے نہیں راجہ سمدرگپت نے بنوایا تھا‘
قسط-74،17 نومبر2008آر ایس ایس کی ایما پر اسکولی کتابوں میں لکھا گیا-’ہٹلر ہمارا لیڈر ہے اور ہم اس سے محبت کرتے ہیں‘
قسط-75،18 نومبر2008تعلیم کو دیا فرقہ وارانہ رنگ-تاکہ مسلمانوں کے خلاف ذہن سازی کی جاسکے
قسط-77 ،20نومبر2008سنگھ پریوار معصوم ذ ہنوں کو ترغیب د یتا ہے کہمسلمان غدار، ملک دشمن اور آلودگی پھیلانے والے ہیں
قسط-78،21 نومبر2008سنگھ پریوار کا بین الاقوامی نیٹ ورککیا یہی وجہ ہے ساری دنیا میں مسلمانوں کو دہشت گردی سے جوڑے جانے کی؟
قسط-79،22 نومبر2008آر ایس ایس کے سرسنگھ چالک کے ایس سدرشن کا ماننا ہے کہ”ہندوستان ہندو راشٹر ہے“
قسط-80،23 نومبر2008دیکھا کتنی منظم اور مضبوط تحریک ہے سنگھ پریوار کی کیا اب بھی آپ کوئی لائحہ عمل بنائیں گے؟
قسط-81،24 نومبر2008راج ناتھ اور اڈوانی مشتبہ دہشت گردوں کے بچاو ¿ میں کیوںکیا اس آگ کے اپنے دامن تک پہنچنے سے ڈر گئے ہیں
قسط-82،25 نومبر2008سوچےں اگر اندریش اور موہن بھاگوت کے قتل کی سازش کامیاب ہوجاتیتو مسلمانوں کا کس قدر قتل عام ہوتا....
قسط-83،26 نومبر2008دھماکوں سے تین دن پہلے ہی ملزمین کو گرفتار کرلیا گیااقبالیہ بیان بھی موجود تھا، بس خالی جگہوں میں نام بھرنے تھے
قسط-84، تاریخ27نومبر2008تم تو کہتے تھے ہمیں کو کہ ہیں غداروطن-ہم نے آئینہ دکھایا تو برامان گئے
قسط-85، تاریخ28نومبر2008ہیمنت کرکرے کے بعد اے ٹی ایس
قسط-86، تاریخ29نومبر2008مالیگاو ¿ں بم دھماکوں کی تفتیش اور ممبئی دہشت گردانہ حملوں کا کیا کوئی تعلق ہے؟اس حقیقت کا پتہ لگانا ضروری ہے
قسط-87، تاریخ یکم دسمبر2008کرکرے کے بعد بھی کیا بے نقاب ہوپائیں گے سفید پوش دہشت گرد؟
قسط-88، تاریخ 2دسمبر20085مختلف مقامات پر 60گھنٹے تک تباہی-اور صرف10دہشت گرد، بات کچھ ہضم نہیں ہوئی
قسط-89، تاریخ 3 دسمبر2008شہیدوں کے عزیز انصاف مانگ رہے ہیںوہ سمجھتے ہیں کہ جو دکھ رہا ہے اس کے پردے میں حقیقت کچھ اور بھی ہے
قسط-90، تاریخ 4 دسمبر2008ممبئی پر دہشت گردانہ حملہ یا عمل کا ردعمل-’عمل‘ کرکرے کی جانچ اور ’ردعمل‘ کرکرے کی موت
قسط-91، تاریخ 5 دسمبر2008کسی بھی فیصلہ سے پہلے ہماری سرکار یہ تو سوچےقابل یقین کون! دہشت گرد ”قصاب“ یا ”شہید کرکرے“
قسط-92، تاریخ 6 دسمبر2008پرگیہ اور پروہت نئے نہیں ہیں-دہشت گردی1947سے ہی آر ایس ایس کا کلچر رہی ہے!
قسط-93، تاریخ 7 دسمبر20081993کے علاوہ سبھی دہشت گردانہ حملے سنگھ وموساد کی سازش کا نتیجہ ہے!کرکے اس سچائی کو سامنے لارہے تھے
قسط-94، تاریخ 9 دسمبر2008کون ہے ماسٹر مائنڈ ان دہشت گردانہ حملوں کا-کیا سوچتے ہیں آپ! غور کریں اور بتائیں
قسط-95، تاریخ 11 دسمبر2008اگر پولیس کو دیا گیا قصاب کا بیان سچاتو پھر پرگیہ، پروہت اور پانڈے کے بیان بھی سچے!
قسط-96، تاریخ 14 دسمبر2008”قصاب“ ناو سے اترا، پانی اور کیچڑ سے گزرا، اسٹیشن پہنچا،لیکن نہ کیچڑ جوتوں پر اور نہ بھیگنے کے نشان پینٹ پر
قسط-97، تاریخ 15 دسمبر2008ممبئی پر حملہ کرنے والے دہشت گرد پاکستانی-مگر کیا ان کا کوئی ساتھی ہندوستانی بھی!
قسط-98، تاریخ 16 دسمبر2008اس مسلسل مضمون کی 100ویں قسط ایک دستاویز ہوگیاور اس کی تفصیل کا اعلان ہم قسط نمبر-99میں کریں گے
قسط-99، تاریخ 21 دسمبر2008شہادت تو شہادت ہے، اس پر سوال کیسا-مگر حقیقت کا سامنے آنا بھی ملک کے مفاد میں ہے....................................................(جاری)
इस वक़्त के हालात और वाक्यात भी कुछ कहते हैं, सुनिये तो!
क़िस्त-59, 01।11।2008
कानपुर पुलिस और उत्तर प्रदेश सरकार बताए किराजीव नगर बम धमाकों की हकीकत क्या है।
क़िस्त-60, 02.11.2008
पर क्या इंडियन मुजाहेदीन बजरंगदल का ही कोड नेम है!
क़िस्त-61, 03।11.2008
अब बताओ आसाम बम धमाकों का असल मुजरिम कौन है
क़िस्त-62, 04.11.2008
साज़िश बहुत गहरी है फिरक़ापरस्तों कीलेकिन अब पर्दा उठने लगा है
क़िस्त-63, 05.11.2008
मुक़दमे की यह आग हम तक भी पहुंचेगी उम्मीद न थी
क़िस्त-64, 06.11.2008
‘सारे मुसलमान दहशतगर्द नहीं पर सारे दहशतगर्द मुसलमान हैं’,क्या अब भी यही कहेंगे आडवाणी जी!
क़िस्त-65, 07.11.2008
संघ परिवार की देन हैं फ़ौज में राष्ट्र विरोधी तत्व
क़िस्त-66, 08.11.2008
मेरा बेटा पिछले नौ महीनों से जेल में कै़द था फिर उसे कुछ महीने पहले हुए बमधमाकों के सम्बंध में कैसे पकड़ा जा सकता है?
क़िस्त-67, 09.11.2008
पुरोहित ने माना वही मास्टर माइंडपर क्या सिर्फ मालेगांव बम धमाकों का या इण्डियन मुजाहेदीन का भी!
क़िस्त-68, 10.11.2008
हैदराबाद बम धमाकों की नए सिरे से जाँच करेगी नए नए खुलासे
क़िस्त-69, 11.11.2008
हैदराबाद जमियत उलमाऐ हिन्द का तारीख़ी जलसामुख्यमन्त्री का भैंसा और वटोली घटनाओं की सी बी आई जांच का वादा
क़िस्त-70, 12.11.2008
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का मुक़दमा लड़ेंगे बाल ठाकरे और आतिफ, साजिद व मुफ़्ती अबुलबशर का मुक़दमा?
क़िस्त-71, 14.11.2008
रोज़नामा राष्ट्रीय सहारा तो अबाबीलों की भांति हैऔर सामने अबरहा का लश्कर है
क़िस्त-72, 15.11.2008
संघ परिवार के इशारे पर पाठ्यक्रम की पुस्तकों में विष घोलनामासूम मस्तिषकों को गुमराह करने का सुनियोजित षड़यंत्र
क़िस्त-73, 16.11.2008
संघ परिवार का नया प्रोपैगंडा‘दिल्ली का कुतुब मीनार कुतुबुद्दीन ने नहीं राजा समुद्र गुप्त ने बनवाया था
क़िस्त-74, 17.11.2008
आर।एस.एस के इशारे पर स्कूली पुस्तकों में लिखा गया‘‘हिटलर हमारा नेता है और हम उससे प्रेम करते हैं।’’
क़िस्त-75, 18.11.2008
शिक्षा को दिया साम्प्रदायिक रंगताकि मुसलमानों के विरूद्ध मानसिकता बनाई जा सके
क़िस्त-77, 20.11.2008
संघ परिवार मासूम मानसिकता को उकसता है किमुसलमान ग़द्दार, देश द्रोही और गंदगी फैलाने वाले हैं
क़िस्त-78, 21.11.2008
संघ परिवार का अन्तर्राष्ट्रीय नेटवर्कक्या यही कारण है सारी दुनिया में मुसलमानों को आतंकवाद से जोड़े जाने का?
क़िस्त-79, 22.11.2008
आर।एस.एस के सरसंघ चालक के.एस.सुदर्शन का मानना है कि‘‘हिन्दुस्तान हिन्दू राष्ट्र है’’
क़िस्त-80, 23.11.2008
देखा कितनी संगठित और मज़बूत कार्य प्रणाली है संघ परिवार कीक्या अब भी आप कोई कार्य योजना बनाऐंगे?
क़िस्त-81, 24.11.2008
राजनाथ और आडवाणी संदिग्ध आतंकवादियों के बचाव में क्योंक्या इस आग के अपने दामन तक पहुँचने से डर गए हैं
क़िस्त-82, 25.11.2008
सोचें अगर इंद्रेश और मोहन भागवत की हत्या की साज़िश सफल हो जाती-तो मुसलमानों का किस क़दर क़त्लेआम होता ह्न
क़िस्त-83, 26.11.2008
धमाकों से तीन दिन पहले ही आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया गयाइक़बालिया बयान भी मौजूद था, बस रिक्त स्थानों में नाम भरने थे
क़िस्त-84, 27.11.2008
तुम तो कहते थे हमीं को कि हैं ग़द्दारे वतनहमने आईना दिखाया तो बुरा मान गए!
क़िस्त-85, 28.11.2008
हेमंत करकरे के बाद ए।टी.एस?
क़िस्त-86, 29.11.2008
मालेगांव धमाकों की जांच और मुम्बई आतंकवादी हमलों का क्या कोई संबंध है?-इस सच्चाई का पता लगाना होगा
क़िस्त-87, 01.12.2008
करकरे के बाद भी क्या बेनक़ाब हो पाएंगे सफ़ेदपोश दहशतगर्द?
क़िस्त-88, 02.12.20085
अलग अलग स्थानों पर 60 घण्टे तक तबाहीऔर केवल 10 आतंकवादी, बात कुछ हज़म नहीं हुई
क़िस्त-89, 03.12.2008
शहीदों के रिश्तेदार न्याय मांग रहे हैंवह समझते हैं कि जो दिख रहा है उसके पर्दे में सच्चाई कुछ और भी है
क़िस्त-90, 04.12.2008
मुम्बई पर आतंकवादी हमला या क्रिया की प्रतिक्रिया‘क्रिया’ करकरे की जांच और ‘प्रतिक्रिया’ करकरे की मौत
क़िस्त-91, 05.12.2008
किसी भी निर्णय से पहले हमारी सरकार यह तो सोचेविश्वसनीय कौन! आतंकवादी ‘क़साब’ या ‘शहीद करकरे’
क़िस्त-92, 06.12.2008
प्रज्ञा और पुरोहित नए नहीं हैंआतंकवाद 1947 से ही आर।एस.एस का कल्चर रहा है!
क़िस्त-93, 07.12.2008
1993 के अतिरिक्त सभी आतंकवादी घटनाएं संघ व मोसाद की साज़िश का नतीजा है!-करकरे इस सच्चाई को सामने ला रहे थे
क़िस्त-94, 09.12.2008
कौन है मास्टर माइंड इन आतंकवादी हमलों काक्या सोचते हैं आप! विचार करें और बताएं
क़िस्त-95, 11.12.2008
अगर पुलिस को दिया गया क़साब का बयान सच्चातो फिर प्रज्ञा, पुरोहित और पाण्डे के बयान भी सच्चे!
क़िस्त-96, 14.12.2008
‘‘क़साब’’ नाव से उतरा, पानी और कीचड़ से गुज़रा, स्टेशन पहुंचा,लेकिन न कीचड़ जूतों पर और न भीगने के निशान पैंट पर
क़िस्त-97, 15.12.2008
मुम्बई पर हमला करने वाले आतंकवादी पाकिस्तानीमगर क्या उनका कोई सहयोगी भारतीय भी!
क़िस्त-98, 16.12.2008
इस लगातार लेख की 100वीं कड़ी एक दस्तावेज़ होगीऔर इसके विवरण का एलान हम कड़ी न।99 में करेंगे
क़िस्त-99, 21.12.2008
शहादत तो शहादत है, इस पर सवाल कैसामगर सच्चाई का सामने आना भी देश के हित में है......................................................(जारी)


